One day I saw a Dream

Sl No Student Topic Document
1 Seema Naik, IXA A Horrible Dream Click here to download article
2 Akash Mohanty, IXA The Door to Hell Click here to download article
3   The Real Spirits Click here to download article
4   My dream to be a doctor Click here to download article
5   Dream of Mine Click here to download article
6 Rachana Priyadarshini, IXA When I Opened My Eyes Click here to download article
7   Ghost in My Dream Click here to download article

 

जीवन की सार

एक दिन किसी कारण से स्कूल में छुट्टी की घोषणा होने के कारण एक दर्जी का बेटा आपने पापा की दुकान पर चला गया । वहाँ जाके वह बड़े जान से आपने पापा को काम करते हुए देखा उसने देखा की उसके पापा कैंची से कपड़े को काटते है और कैंची को पैर के पास टांग से दबाकर रख देते है ।फिर सुई से उसको सीते है । और सिने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते। जब उसने इसी क्रिया को चार पाँच बार देखा तो उससे रहा न गया तो उसने पापा से कहा की वह उनसे एक बात पूछना चाहता है ?

पापा- “क्या पूछना चाहते हो पूछो ?”

बेटा – पापा मे बड़ी देर से देख रहा हूँ , आप जब भी कपड़ा काटते है ,उसके बाद कैंची को पैर के नीचे दबा देते है , और सुईसे कपड़े सिने के बाद , उसे टोपी पर लगा लेते है ,ऐसा क्यूँ ?

इसका ज़ो उत्तर पापा ने दिया उन दो पंक्तियों मे मानो उसने ज़िदिगी का सारा सार ही बता दिया ।

उत्तर था ;-बेटा कैंची काटने का काम करती है और सुई जोड़ने का काम करता है । परंतु जोड़ने वाली की जगह हमेशा नीची होती है परंतु जोडनेवालों की जगह सदैव उपर होती है ।यही कारण है जिसके लिए मे सुई ऊपर और कैंची नीचे रखता हूँ ।

 

नाम – मुनमुन दास

कक्षा – नौवी “अ'

 

केन्द्रीय विद्यालय

जहां पढ़ाई के संग संग हम खेलते खेल ,

नए नए साथी मिलते है , सबसे होता मेल ।

जहां पढ़ाया जाता है हमको विद्या माँ का पाठ ,

जिसके पढ़ने में होता है नया निराला ठाठ ।

कितना प्यारा है यहा विद्यालय चलो करे एक काम ,

तुरंत लिखाओ केन्द्रीय विद्यालया तुम भी अपना नाम ।

नाम -सुभद्रा साहू

कक्षा – नौवी “ब”

 

MY FIRST DAY AT K.V

The first day I went to school,

I resembled myself to be a fool.

Without knowing any rule,

I walked to the class like a mule.

In the class I took a seat

With my trembling feet.

Next to hear was the assembly bell,

I wished if I could visit a wishing well!

Then I returned to the class

And found my pen was forgot ,Alas!

I feared to borrow any

But when asked got many!!

All my friends were really helping,

And this gave me the happiest feeling.

Their friendship was enjoyed by me,

And I wondered how lucky it was to be.

I returned home with a pleasant heart

And my parents asked ,how was the start

And I replied without any flatter

“The first day could not have been better”

BRATADEEP SAHOO X A